KAHANI | KYA DOSTI KARNI CHAHIYE YA NAHI

दोस्तो आज हम आपको बताने जा रहे है एक kahani के बारे मे जो हमारी जिंदगी मे बहुत काम देने वाली है इस कहानी मे आपको पता चलेगा की इस जमाने मे हमे दोस्ती करनी चाहिए या नहीं। आपको इस सबाल का जबाब भी इस लेख मे जरूर मिल जाएगा तो आइये पड़ते है इस कहानी को।

KAHANI | KYA DOSTI KARNI CHAHIYE YA NAHI
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KAHANI | क्या दोस्ती करनी चाहिए या नहीं 

हर इंसान का आज के दौर मे एक मित्र जरूर होता है लेकिन हम आपको बता दे कि मित्रता की प्रथा हजारों साल से चली आ रही है। हजारों साल पहले भी लोग अपने दुखों को बाटने के लिए मित्र बनाया करते थे और उनके साथ वह खुशी से जिन्दगी बिताते थे।  



मित्र हमे बच्चपन से बुडापे तक मिलते रहते है और नए नए मित्र भी हम बनाते जाते है। मित्र का होना हमारे लिए इतना ही जरूरी है जैसा की हमारे लिए हमारा परिवार का होना जितना जरूरी है। सदियों पहले जो मित्र हुआ करते थे उनकी कुछ बात ही और थी लेकिन आज के मित्र किस प्रकार है यह सोचने वाली बात है कि हमे किस तरह के दोस्त बनाने चाहिए। 


  • हमारे ही करीबी के साथ दोस्ती के बारे मे घटना घटी जो हम आपको आज बताने वाले है। 
  • इस kahani से हमे ये पता चलेगा की आजकल के दोस्त किस प्रकार के होते है। 
  • हमे किस तरह के दोस्त रखने चाहिए। 
  • क्या हमे दोस्ती करनी चाहिए या नहीं। 
  • अच्छे दोस्त की पहचान किस तरह से करनी चाहिए। 
  • बुरे दोस्तो की पहचान। 


KAHANI :- 32 साल के सोनू की ( कलपिनिक नाम )


सोनू आज 32 साल के हो चुके है इन्होने अपनी जिंदगी मे बहुत कुछ देखा है। इनका जन्म एक गाँव मे हुआ था ये अपने गाँव मे आज भी रहते है ये बताते है कि दोस्ती के असली मायने। सोनू ने बच्चपन से ही काफी मित्र बनाए थे यह इनके साथ हँसते खेलते रहते थे उस समय पर इनका बच्चपना चल रहा था। 



जब यह छोटे थे तब घर के करीब रहने वाले बच्चे ही इनके सच्चे दोस्त हुआ करते थे लेकिन ये जैसे जैसे बड़े होते जा रहे थे तो इनके दोस्त और भी ज्यादा बढ़ते जा रहे थे। जैसे ही सोनू का नाम एक स्कूल मे लिखवाया तो सोनू स्कूल जाने लगा। 



स्कूल मे सोनू के नए नए और दोस्त बन गए तब सोनू का मन भी स्कूल मे लगने लगा था क्योकि सोनू के दोस्त सोनू को अपने पास ही रखने लगे थे। सोनू के जीवन मे बहुत से दोस्त बने जब तक सोनू ने पढ़ाई की तब तक उसको अच्छे दोस्तो की कोई कमी नहीं थी। 



सोनू का भी कहना था कि बच्चपन जैसे दोस्त आज तक उसे दुबारा नहीं मिले जो अपना खाना भी मुझे खिला दिया करते थे लेकिन जब इनकी पढ़ाई खत्म हो गई और ये अपने काम मे लग गए तो वो स्कूल के दोस्त सभी बिझड़ गए क्योकि वह भी अपने काम मे लग और अपने परिवार वालो का हाथ बटाने लग गए। 




सोनू अब अपना रोजगार करने लगे थे तब उनके कुछ और दोस्त बने जिनके साथ सोनू रहने लगे थे लेकिन ये दोस्त किस प्रकार थे ये सोनू को नहीं पता था। उस समय पर इनके लगभग 10 से भी ज्यादा दोस्त बन चुके थे लेकिन जैसे जैसे इनकी भी शादी होती जा रही थी ये दोस्त भी बदलते जा रहे थे । 




कुछ समय बाद इनके मात्र 4 दोस्त बचे थे जिन मे से 2 कि शादी हो गई थी और दोस्त कुँवारे थे। सोनू का इन 4 दोस्तो के साथ अच्छा खासा तालमेल था। अब सोनू की भी शादी हो चुकी थी लेकिन सोनू फिर भी अपने दोस्तो के साथ रहते थे क्योकि ये दोस्तो को अच्छा समझते थे इसलिए समय बिताने के लिए इन दोस्तो के पास आ जाया करते थे। 




2 साल बाद इन दोस्तो मे कुछ बदलाव सा आता जा रहा था ये दोस्त सामने तो अच्छे से रहा करते थे लेकिन पीठ पीछे कुछ और हो जाया करते थे। किसी दोस्त के पास पैसा आ गया था तो वह अपने पैसे पर घमंड करने लगा था तो कोई दोस्त इनको नीचा दिखाने की कोशिश करने लगा था। 



ये बदलाव सिर्फ पैसा और राजनीति के कारण हुये थे इसलिए इन दोस्तो मे अहंकार आता जा रहा था। ये दोस्त उस अहंकार मे बहुत बुरी तरह से फस चुके थे। जब सोनू को इस बात का अहसास होने लगा था कि उनके दोस्त उनसे कन्नी काटते जा रहे है तो सोनू को समझ मे आ चुका था कि वह बच्चपन के दोस्त अब मे कहा से लाउ क्या दौर था। 




ये सभी दोस्त सोनू को इसलिए नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि उस समय पर सोनू की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी इसलिए ये सब बदलाव सोनू ने देखे थे। सोनू को पता चल गया था सिर्फ आजकल की दोस्ती मात्र पैसे की रह गई है। 



सोनू ने धीरे धीरे इन सभी दोस्तो से दूरियाँ बनानी शुरू कर दी और अपने काम मे मस्त होने लगे क्योकि सोनू का मानना था कि दोस्तो के साथ रहने से उनको अपने सम्मान मे भी हानि हो रही थी और साथ मे समय की भी हानि हो रही थी। 



सोनू ये पूरा झंझट एक बार मे खत्म किया और अपने काम मे दिल जान से लग गए। आज के समय मे सोनू के गिने चुने दोस्त है जो उनपर जान झिड़कते है और सोनू भी उन दोस्तो पर जान झिड़कते है। 


KAHANI | KYA DOSTI KARNI CHAHIYE YA NAHI
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हमे किस तरह के दोस्त रखने चाहिए 


दोस्तो आज के जमाने मे हमे अपनी जिंदगी हँसते खेलते बितानी है तो हमे दोस्त जरूर बनाने पड़ेंगे क्योकि आप दोस्तो के साथ ही हंसी मज़ाक, पार्टी आदि कर सकते है। दोस्त हमारा हम सफर होता है अगर वह दोस्त अच्छा है अपने दोस्त की फिलिंग समझता है तो। 



हमे अच्छे दोस्त हमेशा रखने चाहिए अगर वह दोस्त रूठ भी जाए तो उन दोस्तो मानाना भी चाहिए कि शायद आपको इस तरह के अच्छे दोस्त दुबारा जिंदगी न मिल सके। ऐसे दोस्तो को कभी खोना नहीं चाहिए जो आपके लिए आधी रात खड़े होते हो। 


क्या हमे दोस्ती करनी चाहिए या नहीं 


हाँ हमे जरूर दोस्ती करनी चाहिए लेकिन हम आपको बता दे कि हमे हमे सिर्फ अच्छे लोगो के साथ दोस्ती करनी चाहिए। अगर आप अच्छे लोगो से दोस्ती करेंगे तो आप कभी भी किसी तरह की मुश्किल मे नहीं फसेंगे क्योकि इस समस्या मे सबसे पहले दोस्त ही काम आते है। 



हमे दोस्तो की पहचान किस तरह से करनी चाहिए 


दोस्तो की पहचान करना बहुत ज्यादा आसान है हम आपको बता दे कि हमेशा अच्छे दोस्त आपसे मिलने आते रहेंगे अगर दोस्त काम मे लगा हुआ है तो अलग बात है। आपका दोस्त अंजान आदमी के सामने आपकी इज्जत पर खेल जाता है वह आपका अच्छा दोस्त नहीं है वह सिर्फ दोस्त होने का नाटक कर रहा है। 


आप सोच रहे होंगे कि दोस्तो मे तो अक्सर ऐसा होता रहता है लेकिन हम आपको जानकारी दे दे कि अगर आप साथ सभी दोस्त है और कोई दूसरा आदमी नहीं है तब आपके साथ इस तरह की घटना घटती है तो ये दोस्ती के लिए एक मज़ाक का विषय है लेकिन अगर आपका दोस्त इस तरह की घटना किसी अंजान आदमी के सामने कर रहा है तो ये बात सोचने वाली बात है। 




बुरे दोस्तो की पहचान



बुरे दोस्त की पहचान अगर आपके साथ कुछ एसी घटना घटी है जो सिर्फ आपकी मदद आपका दोस्त ही कर सकता है तो वह काम मे आ जाए तो अच्छा है नहीं आए तो बुरा। इसमे कोई पैसे की बात नहीं है क्योकि कुछ दोस्त के पास इतने पैसे नहीं होते है कि आपको वह दे दे ऐसे मे हम उसको बुरा नहीं कहेंगे। अगर दोस्त कैसा भी है वह आपके साथ खड़ा है तो वह सबसे अच्छा दोस्त है उसको कभी भी न जाने दे। ऐसा दोस्त अगर गरीब भी है तो उसका मज़ाक न उड़ाए वल्कि उसकी मदद जरूर करे। 



दोस्तो आप क्या कहेंगे अपने दोस्तो के बारे मे हमे कमेंट मे जरूर बताए अगर आप इस तरह की kahani पड़ना पसंद करते है तो हमारे ब्लॉग का नाम जरूर याद रखे आपका दिन शुभ रहे। 

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