ladki ke pichhe padi ek bhayanak aatma, horror story in hindi - Bhoot ki kahani

Monday, February 25, 2019

ladki ke pichhe padi ek bhayanak aatma, horror story in hindi

ladki ke pichhe padi ek bhayanak aatma, horror story in hindi

नमस्कार दोस्तो आप सभी का हमारे मे दिल से स्वागत है हम आपको एक ऐसी कहानी के बारे मे बताने जा रहे है जो दिल दहलाने वाली horror strory है। जो एक लड़की को के पीछे ऐसे पड़ गई की उस लड़की को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा आइये जानते है इस horror story in hindi मे। 
ladki ke pichhe padi ek bhayanak aatma, horror story in hindi
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horror story in hindi:- दोस्तो बहुत खूबसूरत लड़की एक गाँव मे रहा करती थी उसका नाम था मीनू (कलपिनिक नाम)। मीनू बहुत सुंदर लड़की थी जो अपने गाँव मे सुंदरता के लिए मशहूर थी। उसकी उम्र उस समय पर 14 साल थी। इस उम्र मे वह सिर्फ पड़ रही थी और अपनी माँ के साथ घर का काम भी किया करती थी। उस लड़की का जीवन खुशहाल चल रहा था लेकिन तभी इस लड़की से एक खतरनाक गलती हो जाती है जो उसे आगे जाकर भुगतनी पड़ती है। 



जब अपने साथियो के साथ एक दिन पड़ने जा रही थी तब मीनू के दोस्तो ने कॉलेज के पास पार्क मे घूमने की बात कही यह पार्क कॉलेज से लगभग 1 किलोमीटर पर था। यहा पर अक्सर लोग घूमा करते थे। इस पार्क को बने काफी साल बीत चुके थे यह पार्क 100 पुराना था। इस पार्क मे हरे भरे पेड़ जो की सालो पुराने थे मीनू के दोस्त मीनू को लेकर इस पार्क मे ठहलने के लिए आ जाते है। जब सारे दोस्त टहल रहे होते है तब मीनू की नजर एक पेड़ पर पड़ती है जो कि बहुत अजीब लग रहा था। मीनू के मन मे जिज्ञासा हो रही थी कि इस पेड़ को करीब से देखा जाए।




मीनू उस पेड़ की तरह जाती है और इस पेड़ को देखने लग जाती है। इस पेड़ की छाओ मे मीनू बेठ जाती है और अपने सभी दोस्तो वहा पर बुला लेती है कहती है यहा पर अच्छी हवा चल रही है यहा पर आ जाओ। मीनू के सभी दोस्त इस पेड़ की छाओ के नीचे बैठ जाते है और आपस मे बातें करने लग जाते है। किसी किसी की बात पर सभी दोस्त एक दूसरे को देखकर हसने भी लगते है। जब मीनू अपने दोस्तो की बात पर हंस रही होती है तभी उसके मुंह मे कोई छोटा सा कीड़ा आ जाता है।

मीनू का हँसना रुक जाता है और मीनू घिनिया जाती है और उसी पेड़ के नीचे उलटिया करने लगती है। मीनू को उलटिया करता देख उसके सभी दोस्त मीनू को एक पानी की बोतल देते है और कुल्ला कर कर अपना मुंह साफ करने के लिए कहते है। कुछ देर बाद मीनू पूरी तरह से सही महसूस करने लग जाती है। मीनू अपने दोस्तो के साथ कॉलेज जाती है फिर घर को रवाना हो जाती है लेकिन मीनू को यह नहीं पता था कि उस पेड़ पर एक bhayanak aatma रहती है। इस पार्क के उसी पेड़ पर एक आत्मा कई सालो से रह रही थी लेकिन किसी को नुकसान नहीं पाहुचाया करती थी।

इस bhayank aatma को जब बुरा लगा जब मीनू ने इसी पेड़ के नीचे उलटिया की। यह आत्मा इतनी ज्यादा भड़क जाती है कि मीनू से नफरत करने लग जाती है। मीनू को कुछ दिन का इस बात का एहसास नहीं हो रहा था लेकिन कुछ ओर दिन बीतने के बाद मीनू को ऐसा लगने लगा था जैसे कि कोई उसका पीछा कर रहा हो और उसके शरीर पर स्पर्स कर रहा हो। जब इस तरह कि घटना मीनू के साथ एक दो बार हुई तो मीनू ने इस घटना को नजर अंदाज कर दिया। मीनू के साथ यह घटना एक दो बार नहीं हुई लगातार होती गई।

मीनू इस तरह की घटना को एहसास कर डरने लगी थी। जब भी मीनू रात मे सोया करती थी तो कभी कभी भयानक सपने आया करते थे। इन सपनों के देखकर अचानक से मीनू की आँख खुला करती थी तो उसे काफी डॉ नींद नहीं आया करती थी। जब उसे नींद नहीं आया करती थी तो कुछ पुकारने की आबजो का एहसास करती थी और कभी उसके सामने कोई परछाई सी आकर चली जाती थी। मीनू इन सभी घटनाओ से बहुत ज्यादा डर गई थी। जब उसके साथ यह घटनाए होने लगी तो इसकी जानकारी मीनू ने अपने माता पिता को दी। मीनू के माता पिता ने इस बात को सिरियस लिया और किसी झाड़ फूक वाले बाबा को दिखाया।


उस बाबा ने मीनू को देखा और एक खतरनाक आत्मा होने की बात कही और यह भी बताया की यह आत्मा उस पेड़ से पीछा कर रही है जहा पर इस लड़की ने उलटिया की थी। मीनू के माता पिता ने इसका निवारण उस बाबा से पूझा तो बाबा ने बताया की इस लड़की का इलाज किया जाएगा लेकिन इसमे बहुत टाइम लगेगा। बाबा ने कहा की हर तीसरे दिन इस लड़की को मेरे पास लाना पड़ेगा तभी इसका इलाज हो संभव है। बाबा ने अपनी विधा के जरिये इस आत्मा को मीनू से दूर भगा दिया। बाबा ने लड़की को तीन दिन के बाद लाने को कहा। मीनू के माता पिता मीनू को लेकर घर आ जाते है।

एक दिन ही मीनू सही से रह पाती है और दूसरे दिन जब मीनू घर मे रात मे सो रही होती है तभी ये आत्मा मीनू के शरीर मे घुस जाती है और उसके शरीर पर कवजा कर लेती है। यह आत्मा मीनू को अंदर से खोकला करने लग जाती है। यह चांडाल आत्मा मीनू के शरीर मे करीब 1 बजे के टाइम पर हमला करती है। मीनू तड़पने लग जाती है और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लग जाती है। मीनू के चिल्लाने पर मीनू माता पिता भी उठ जाते है और मीनू की इस हालत को देखकर घबरा जाते है।




रात का एक बज रहा होता है जल्दी जल्दी मीनू के पिता एक डॉक्टर को बुलाकर लाते है। डॉक्टर मीनू को दबाई भी देता है लेकिन मीनू को इन दबाइयों से कुछ असर नहीं पड़ता है। मीनू के माता पिता समझ तो चुके थे कि उनकी बच्ची को क्या हुआ है लेकिन कर कुछ नहीं सकते थे क्योकि रात का 1 बज रहा था नाही कोई साबारी थी। जैसे जैसे घंटे बीतते जा रहे थे वैसे वैसे मीनू की हालत खराब होती जा रही थी। 4 बजे के समय मीनू के पिता एक सबारी का इंतजाम करते है ताकि मीनू को उस बाबा के पास ले जाया जाए।

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जल्दी जल्दी मीनू को उस सबारी मे बेठाया जाता है मीनू की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उसका हिलना डुलना भी धीरे धीरे कम होता जा रहा था। मीनू को बाबा तक पहुचाने के लिए आधा ही रास्ता कटा था तभी मीनू ने अपना दम तोड़ दिया। मीनू से उस आत्मा को बरदस्त नहीं किया जा रहा था और उस पीड़ा को बरदस्त नहीं कर पा रही थी जो वो आत्मा उसको दे रही थी। उस चांडाल आत्मा ने आखिर एक बच्ची कि जान ले ही ली।

दोस्तो आपको यह कहानी कैसी लगी हमे कमेंट बॉक्स मे जरूर बताए अगर आप इस तरह की कहानिया पड़ना चाहते है तो bhoot ki kahani पर जरूर आए और साथ ही इस कहानी को अपने दोस्तो के साथ शेयर करना न भूले आपका दिन शुभ रहे।  






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