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Saturday, April 6, 2019

ruhani bhatakti aatma ki kahani, bhoot ki kahani

रूहानी भटकती आत्मा की कहानी, भूत की कहानी 

दोस्तों आप सभी का हमारे ब्लॉग में बहुत- बहुत स्वागत है। आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसी आत्मा की कहानी के बारे में जो एक भटकती आत्मा की कहानी है। आइये जानते है इस कहानी के बारे में। 
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पहाड़ी इलाके में एक औरत अपने परिवार के साथ रहा करती थी। इस औरत का नाम (काल्पनिक नाम ) रानी था। यह औरत झोपड़पट्टी में रह कर अपना जीवन गुजर करती थी। झोपड़पट्टी में औरत अपने पति (काल्पनिक नाम) रमेश के साथ रहा करती थी। रानी की शादी को 20 साल हो गए थे लेकिन उसको एक भी संतान नहीं थी। रानी को बच्चों से बहुत ही ज्यादा लगाओ था मैं किसी के बच्चे को देखा करती तो उसे दुलार ने लग जाती। रानी को 20 साल तक संतान ना होने के कारण रानी इस बात पर दुखी रहा करती थी।

रानी संतान प्राप्ति के लिए अक्सर तांत्रिकों के पास जाया करती थी। रानी को उम्मीद थी कि शायद झाड़-फूंक से मेरे घर में किसी संतान का जन्म हो जाए। इसी उम्मीद से वह तांत्रिकों के पास जाया करती थी। लेकिन तांत्रिकों के पास जाने के बाद भी रानी को कोई संतान नहीं हुई। इसी बात पर रानी अक्सर दुखी रहा करती थी कि उसके घर में एक भी संतान नहीं है। रानी ने उम्मीद ही छोड़ दी थी कि कभी उसके संतान प्राप्त होगी। दुखी होकर मैं अपने पति से भी झगड़ा कर देती थी लेकिन पति समझदार होने के कारण मैं उसके दुख को समझता था लेकिन उससे कुछ नहीं कहता था। ruhani bhatakti aatma ki kahani, bhoot ki kahani 
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रमेश के करीबी दोस्त के यहां एक शादी का फंक्शन था। रमेश अपने दोस्त की शादी के फंक्शन में जाता है और अनशन खत्म होने के बाद रमेश अपने करीबी दोस्त से अपने दिल की बात बताता है। रमेश का करीबी दोस्त रमेश को एक राये देता है कि वह तांत्रिको के पास जाना जोड़कर किसी अस्पताल से मेडिकल अपनी पत्नी का मेडिकल गर्भ धारण करा ले इससे सारी परेशानिया ख़त्म हो जाएँगी और तुम्हारी पत्नी भी खुश रहेंगी और तुम्हे बच्चा भी मिल जायेगा। अपने दोस्त की ये बात सुनकर रमेश घर को आ जाता है। अपनी पत्नी को यह बात बताता है। उसकी पत्नी माँ जाती है। एक अस्पताल को रमेश और रानी निकल पड़ते है और मेडिकल गर्भ धारण करा लेते है। रमेश की पत्नी को गर्भ में बच्चा स्थापित कर दिया जाता है। 9 महीने के बाद रानी को एक बच्ची होती है।
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रमेश और रानी बड़े ही खुश थे कि उनके घर में एक बच्चे ने जन्म लिया है। रानी बेहद खुश रहने लगती है और अपनी बच्ची से अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करने लगती है हर माँ अपने बच्चे से अपनी जान से ज्यादा प्यार करती है। रानी ने अपनी बच्ची का नाम चाँदनी (काल्पिनिक नाम ) रखा था। चाँदनी 7 साल की हो जाती है। रमेश अपनी पत्नी और बच्ची को लेकर किसी रिस्तेदारी में जाने के लिए निकल जाते है। रमेश और रानी को क्या पता था कि उनके साथ क्या घटना घटने वाली है। जिस बस में रमेश और रानी समेत उनकी बच्ची बैठी थी।  उस बस के अगले टायर में धमाका हो जाता है और वो बस अपना नियन्त्र खो देती है इससे वो बस खाई में गिर जाती है। उस बस में बैठे यात्री कुछ मर जाते है और कुछ तड़प रहे होते है। ऐसे में रानी भी गंभीर हालत में होती है थोड़ा सा तो रानी को होश था लेकिन वह उठ नहीं पा रही होती है। ruhani bhatakti aatma ki kahani, bhoot ki kahani 
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जब रानी को याद आता है की उसकी बच्ची कहा पर है और उसका पति कहा पर है तो वो झटपटाने लगती है और चीखती है जब रानी को नज़ारा दीखता है की उसकी बच्ची और उसका पति अब इस दुनिया में नहीं है तो रानी और जोर से चीखने लग जाती है। खाई में गिरी बस के लिए कोई जल्दी मदद भी नहीं पहुँचती है जो लोग वह पर तड़प रहे थे उनकी दर्दनाक मौत हो रही थी। इस तरह से रानी ने भी अपनी बच्ची चाँदनी को याद करते करते तड़प तड़प कर अपना डैम तोड़ दिया। कहते है कि जब कोई मरने से पहले किसी की इच्छाएं रह जाती है तो उसकी aatma हमेशा के लिए भटकती रहती है। ऐसा ही रानी के साथ हुआ मरने के बाद रानी की आत्मा भटकने लगी। कहते है जहा पर रानी की मौत हुई थी। उस रोड से गुजरने वाले वाहनों के ड्राइवरों को वाहा से चीखने की आबाजे सुनी यह आबजे इतनी दर्दनाक थी एक बार इन आबाजो को कोई सुनले तो वो आसानी से नहीं भूल पाए।


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कुछ लोगो तो उस रोड पर एक भटकती आत्मा को भी देखा उनका कहना था की वह औरत चीखती चिल्लाती और बेटा बेटा चिल्लाती थी। लोगो को कुछ महीने बाद पता चला की वहा पर किसी अज्ञात महिला नहीं घूमती है वल्कि वह एक आत्मा है। रात के समय में लोगो ने उस रोड पर डर के मारे आना ही छोड़ दिया था। सभी लोगो का कहना था उस हादसे में रानी की जान तो चली है लेकिन उस बच्ची के दुःख में रानी की आत्मा आज भी भटक रही है। रानी की आत्मा ने किसी को नुकसान तो नहीं पहुंचाया लेकिन ये किस्सा और इसका अनुभव एक darawna मंजर दिखाई देता है। ruhani bhatakti aatma ki kahani, bhoot ki kahani 

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